riyaazaton ki tapish men rah kar pighal raha hooñ | रियाज़तों की तपिश में रह कर पिघल रहा हूँ

  - Nadeem Sirsivi
रियाज़तोंकीतपिशमेंरहकरपिघलरहाहूँ
येबातसचहैमैंधीरेधीरेबदलरहाहूँ
अलामत-ए-ख़ाक-ज़ादगीहोमज़ीदरौशन
बसइसलिएख़ाकअपनेचेहरेपेमलरहाहूँ
उतारकरक़र्ज़ज़िंदगानीकारफ़्तारफ़्ता
नफ़सकेवहशत-कदेसेबाहरनिकलरहाहूँ
अना-परस्तोंकेबीचअपनीअनाकेसरको
हूँमुनकसिरइसलिएमुसलसलकुचलरहाहूँ
दुआएँमाँकीक़दमक़दमसाएबाँबनीहैं
'नदीम'गिरगिरकेइसलिएमैंसँभलरहाहूँ
  - Nadeem Sirsivi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy