jab badha dard ki maujon ka dabaav sahab | जब बढ़ा दर्द की मौजों का दबाव साहब

  - Nadeem Sirsivi
जबबढ़ादर्दकीमौजोंकादबावसाहब
मेरीसाँसोंकीलरज़नेलगीनावसाहब
इससेबढ़करनहींअफ़्सुर्दा-मिज़ाजीकाइलाज
दिलअगररोएतोऔरोंकोहँसाओसाहब
घुपअँधेरेमेंउगाताहूँसुख़नकासूरज
बे-सबबथोड़ीहैरातोंसेलगावसाहब
जबनहींमिलतीनएज़ख़्मकीसौग़ातमुझे
छीलदेताहूँपुरानाकोईघावसाहब
जिसकीदानाईनेमंसूख़किएहोश-ओ-हवासे
ऐसेनादानपेपत्थरउठाओसाहब
मैंनेउसहुस्न-ए-मुजस्समकीज़ियारतकीहै
मेरीआँखोंकेज़रादामलगाओसाहब
बिजलियाँवस्लकीसाँसोंपेगिराओसाहब
रुख़सेभीगीहुईज़ुल्फ़ोंकोहटाओसाहब
जैसेसहराओंमेंमिलतेहैंदोप्यासेदरिया
होंटसेहोंटकुछइसतरहमिलाओसाहब
दिलमोहब्बतकीसक़ाफ़तकाअज़लसेहैअमीं
इसशहंशाहकोनफ़रतसिखाओसाहब
जीतकरजश्नमनानातोहुईआमसीबात
हारकरभीतोकभीजश्नमनाओसाहब
हमनएअहदकेसुक़रातहैंइसबारहमें
ज़हरकाप्यालानहींजामपिलाओसाहब
  - Nadeem Sirsivi
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