suroor se atte hue ai mausam-e-visaal ruk | सुरूर से अटे हुए ऐ मौसम-ए-विसाल रुक

  - Nadeem Sirsivi
सुरूरसेअटेहुएमौसम-ए-विसालरुक
मिलेदरीदा-कल्बकोसुकून-इंदिमालरुक
हैरत-ए-गुलाब-रुख़तूइतनाला-जवाबहै
किकहउठेसवालसेहमारेलबसवालरुक
तुझेगिलाहैअबवोलज़्ज़तेंरहींक़ुर्बतें
मैंडालताहूँरक़्स-ए-इश्क़मेंअभीधमालरुक
रासआएगाकोईदिलकोभाएगाकोई
हमारेबिनडसेगातुझकोउम्र-भरमलालरुक
पड़ेगारनअज़िय्यतोंकासम्त-ए-शहर-ए-हिज्ररोज़
उधरजाठहरज़रातूदेखमेराहालरुक
मैंतेरेहस्ब-ए-इद्दआ'नहींहूँवोजोथाकभी
वोथाभीलौटआएगामेरेहम-ख़यालरुक
ग़ज़ल-तराज़ियाँमिरीनिगाह-ए-नाज़सेतिरी
येकररहीहैंइल्तिजाजामिरेग़ज़ालरुक
हवासेखोचुकेहैंसबहुआ'नदीम'जाँ-बलब
तूअबमेरेसामनेहासिल-ए-जमालरुक
  - Nadeem Sirsivi
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