saraab-e-dil se musalsal fareb kha raha hooñ | सराब-ए-दिल से मुसलसल फ़रेब खा रहा हूँ

  - Nadeem Sirsivi
सराब-ए-दिलसेमुसलसलफ़रेबखारहाहूँ
मैंएकउम्रसेअपनेख़िलाफ़जारहाहूँ
यक़ीन-ओ-शककीअजबकैफ़ियतसेहूँदो-चार
बिछारहाहूँमुसल्लाकभीउठारहाहूँ
मिराग़ुरूरहैयेख़ाक-ज़ादगीमेरी
मैंफिरफ़रिश्तोतुम्हेंबातयेबतारहाहूँ
तिलिस्म-ए-लफ़्ज़-ओ-मआ'नीकेफेरमेंफँसकर
ब-शक्ल-ए-नज़्म-ओ-ग़ज़लख़ून-ए-दिलबहारहाहूँ
ख़ियाम-ए-अश्कमेंझुलसीपड़ीहैकोईमुश्क
मैंअपनीप्यासकाक़िस्साउसेसुनारहाहूँ
भुलाकेसारेतक़ाज़ेरदीफ़-ए-मौतकेमैं
फ़क़तहयातकाहरक़ाफ़ियानिभारहाहूँ
  - Nadeem Sirsivi
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