मौज-ए-गुलमौज-ए-सबामौज-ए-सहरलगतीहै
सरसेपातकवोसमाँहैकिनज़रलगतीहै
हमनेहरगामपेसज्दोंकेजलाएहैंचराग़
अबहमेंतेरीगलीराहगुज़रलगतीहै
लम्हेलम्हेमेंबसीहैतिरीयादोंकीमहक
आजकीराततोख़ुशबूकासफ़रलगतीहै
जलगयाअपनानशेमनतोकोईबातनहीं
देखनायेहैकिअबआगकिधरलगतीहै
सारीदुनियामेंग़रीबोंकालहूबहताहै
हरज़मींमुझकोमिरेख़ूनसेतरलगतीहै
कोईआसूदानहींअहल-ए-सियासतकेसिवा
येसदीदुश्मन-ए-अरबाब-ए-हुनरलगतीहै
वाक़िआशहरमेंकलतोकोईऐसानहुआ
येतोअख़बारकेदफ़्तरकीख़बरलगतीहै
लखनऊक्यातिरीगलियोंकामुक़द्दरथायही
हरगलीआजतिरीख़ाक-बसरलगतीहै