jism ki har baat hai aawaargi ye mat kaho | जिस्म की हर बात है आवारगी ये मत कहो

  - Jaan Nisar Akhtar
जिस्मकीहरबातहैआवारगीयेमतकहो
हमभीकरसकतेहैंऐसीशा'इरीयेमतकहो
उसनज़रकीउसबदनकीगुनगुनाहटतोसुनो
एकसीहोतीहैहरइकरागनीयेमतकहो
हमसेदीवानोंकेबिनदुनियासँवरतीकिसतरह
अक़्लकेआगेहैक्यादीवानगीयेमतकहो
कटसकीहैंआजतकसोनेकीज़ंजीरेंकहाँ
हमभीअबआज़ादहैंयारोअभीयेमतकहो
पाँवइतनेतेज़हैंउठतेनज़रआतेनहीं
आजथककररहगयाहैआदमीयेमतकहो
जितनेवादेकलथेउतनेआजभीमौजूदहैं
उनकेवादोंमेंहुईहैकुछकमीयेमतकहो
दिलमेंअपनेदर्दकीछिटकीहुईहैचाँदनी
हरतरफ़फैलीहुईहैतीरगीयेमतकहो
  - Jaan Nisar Akhtar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy