zaad-e-rah mukammal hai | ज़ाद-ए-रह मुकम्मल है

  - Nadeem Asghar
ज़ाद-ए-रहमुकम्मलहै
हौसलामुकम्मलहै
ख़्वाबमरचुकेहैंसब
सानेहामुकम्मलहै
इश्क़जोकियातुमसे
बा-ख़ुदामुकम्मलहै
तुमकहोजोकहनाहै
तख़लियामुकम्मलहै
अबकहींभटकूँगा
येख़ुदामुकम्मलहै
माँनेहाथउठाएहैं
येदु'आमुकम्मलहै
तुमनेजोसुनाईहै
बातक्यामुकम्मलहै
अबकिसीकोक्यादेखूँ
दिलदियामुकम्मलहै
उसकीआँखकहतीहै
शाएरामुकम्मलहै
एकबोसाकाफ़ीहै
नाश्तामुकम्मलहै
  - Nadeem Asghar
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