fikr-e-ma'aash aur mirii shaayri tamaam | फ़िक्र-ए-मआ'श और मिरी शा'इरी तमाम

  - Nadeem Asghar
फ़िक्र-ए-मआ'शऔरमिरीशा'इरीतमाम
दोनोंहीआस्तींमेंपलेज़िंदगीतमाम
हमलग़्ज़िश-ए-ख़फ़ीफ़पेनिकलेथेख़ुल्दसे
ग़ारततिरेग़ुरूरनेकीबंदगीतमाम
लाहक़हुआहैइश्क़तोमेरेवजूदसे
रिसतीहैरोज़-ओ-शबहीमिरीदिल-लगीतमाम
जोंकेंतुम्हारीयादकीचिपकीहैंदिलकेसाथ
पीतीरहेंगीख़ूनमिराज़िंदगीतमाम
तुझकोतिराघमंडमुबारकहुआकरे
अपनी'नदीम'आजिज़ीमेंकटगईतमाम
  - Nadeem Asghar
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