qafas men hooñ gar achha bhi na jaanen mire shevan ko | क़फ़स में हूँ गर अच्छा भी न जानें मेरे शेवन को

  - Mirza Ghalib
क़फ़समेंहूँगरअच्छाभीजानेंमेरेशेवनको
मिराहोनाबुराक्याहैनवा-संजान-ए-गुलशनको
नहींगरहमदमीआसाँहोयेरश्कक्याकमहै
दीहोतीख़ुदायाआरज़ू-ए-दोस्तदुश्मनको
निकलाआँखसेतेरीइकआँसूउसजराहतपर
कियासीनेमेंजिसनेख़ूँ-चकाँमिज़्गान-ए-सोज़नको
ख़ुदाशरमाएहाथोंकोकिरखतेहैंकशाकशमें
कभीमेरेगरेबाँकोकभीजानाँकेदामनको
अभीहमक़त्ल-गहकादेखनाआसाँसमझतेहैं
नहींदेखाशनावरजू-ए-ख़ूँमेंतेरेतौसनको
हुआचर्चाजोमेरेपाँवकीज़ंजीरबननेका
कियाबेताबकाँमेंजुम्बिश-ए-जौहरनेआहनको
ख़ुशीक्याखेतपरमेरेअगरसौबारअब्रआवे
समझताहूँकिढूँडेहैअभीसेबर्क़ख़िर्मनको
वफ़ा-दारीब-शर्त-ए-उस्तुवारीअस्लईमाँहै
मरेबुत-ख़ानेमेंतोका'बेमेंगाड़ोबरहमनको
शहादतथीमिरीक़िस्मतमेंजोदीथीयेख़ूमुझको
जहाँतलवारकोदेखाझुकादेताथागर्दनको
लुटतादिनकोतोकबरातकोयूँँबे-ख़बरसोता!
रहाखटकाचोरीकादु'आदेताहूँरहज़नको
सुख़नक्याकहनहींसकतेकिजूयाहूँजवाहिरके
जिगरक्याहमनहींरखतेकिखोदेंजाकेमादनको
मिरेशाह-ए-सुलैमाँ-जाहसेनिस्बतनहीं'ग़ालिब'
फ़रीदूनजमकेख़ुसरवदाराबबहमनको
  - Mirza Ghalib
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