kya tang ham sitam-zadagaan ka jahaan hai | क्या तंग हम सितम-ज़दगाँ का जहान है

  - Mirza Ghalib
क्यातंगहमसितम-ज़दगाँकाजहानहै
जिसमेंकिएकबैज़ा-ए-मोरआसमानहै
हैकाएनातकोहरकततेरेज़ौक़से
परतवसेआफ़्ताबकेज़र्रेमेंजानहै
हालाँकिहैयेसीली-ए-ख़ारासेलालारंग
ग़ाफ़िलकोमेरेशीशेपेमयकागुमानहै
कीउसनेगर्मसीना-ए-अहल-ए-हवसमेंजा
आवेक्यूँँपसंदकिठंडामकानहै
क्याख़ूबतुमनेग़ैरकोबोसानहींदिया
बसचुपरहोहमारेभीमुँहमेंज़बानहै
बैठाहैजोकिसाया-ए-दीवार-ए-यारमें
फ़रमाँ-रवा-ए-किश्वर-ए-हिन्दुस्तानहै
हस्तीकाए'तिबारभीग़मनेमिटादिया
किससेकहूँकिदाग़जिगरकानिशानहै
हैबारेए'तिमाद-ए-वफ़ा-दारीइसक़दर
'ग़ालिब'हमइसमेंख़ुशहैंकिना-मेहरबानहै
देहलीकेरहनेवालो'असद'कोसताओमत
बे-चाराचंदरोज़कायाँमेहमानहै
  - Mirza Ghalib
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