kahte ho na denge ham dil agar pada paaya | कहते हो न देंगे हम दिल अगर पड़ा पाया

  - Mirza Ghalib
कहतेहोदेंगेहमदिलअगरपड़ापाया
दिलकहाँकिगुमकीजेहमनेमुद्दआ'पाया
इश्क़सेतबीअ'तनेज़ीस्तकामज़ापाया
दर्दकीदवापाईदर्द-ए-बे-दवापाया
दोस्त-दार-ए-दुश्मनहैए'तिमाद-ए-दिलमा'लूम
आहबे-असरदेखीनालाना-रसापाया
सादगीपुरकारीबे-ख़ुदीहुश्यारी
हुस्नकोतग़ाफ़ुलमेंजुरअत-आज़मापाया
ग़ुंचाफिरलगाखिलनेआजहमनेअपनादिल
ख़ूँकियाहुआदेखागुमकियाहुआपाया
हाल-ए-दिलनहींमा'लूमलेकिनइसक़दरया'नी
हमनेबार-हाढूँडातुमनेबार-हापाया
शोर-ए-पंद-ए-नासेहनेज़ख़्मपरनमकछिड़का
आपसेकोईपूछेतुमनेक्यामज़ापाया
हैकहाँतमन्नाकादूसराक़दमयारब
हमनेदश्त-ए-इम्काँकोएकनक़्श-ए-पापाया
बे-दिमाग़-ए-ख़जलतहूँरश्क-ए-इम्तिहाँता-कै
एकबेकसीतुझकोआलम-आश्नापाया
ख़ाक-बाज़ी-ए-उम्मीदकार-ख़ाना-ए-तिफ़्ली
यासकोदो-आलमसेलब-ब-ख़ंदावापाया
क्यूँँवहशत-ए-ग़ालिबबाज-ख़्वाह-ए-तस्कींहो
कुश्ता-ए-तग़ाफ़ुलकोख़स्म-ए-ख़ूँ-बहापाया
फ़िक्र-ए-नालामेंगोयाहल्क़ाहूँज़े-सर-ता-पा
उज़्वउज़्वजूँज़ंजीरयक-दिल-ए-सदापाया
शबनज़ारा-परवरथाख़्वाबमेंख़यालउसका
सुब्हमौजा-ए-गुलकोनक़्श-ए-बोरियापाया
जिसक़दरजिगरख़ूँहोकूचादादन-ए-गुलहै
ज़ख्म-ए-तेग़-ए-क़ातिलकोतुर्फ़ादिल-कुशापाया
हैमकींकीपा-दारीनाम-ए-साहिब-ए-ख़ाना
हमसेतेरेकूचेनेनक़्श-ए-मुद्दआपाया
ने'असद'जफ़ा-साइलनेसितमजुनूँ-माइल
तुझकोजिसक़दरढूँडाउल्फ़त-आज़मापाया
  - Mirza Ghalib
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