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Kabir Altamash
jiski khaatir main apni manzil se door hua
jiski khaatir main apni manzil se door hua | जिसकी ख़ातिर मैं अपनी मंज़िल से दूर हुआ
- Kabir Altamash
जिसकी
ख़ातिर
मैं
अपनी
मंज़िल
से
दूर
हुआ
वो
मुझ
सेे
दूर
हुआ
मेरे
दिल
से
दूर
हुआ
पास
गया
था
मैं
जिसके
दिल
तक
आसानी
से
और
उसी
से
मैं
ही
बहुत
मुश्किल
से
दूर
हुआ
- Kabir Altamash
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इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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तो
क्या
ये
हो
नहीं
सकता
कि
तुझ
से
दूर
हो
जाऊँँ
मैं
तुझ
को
भूलने
के
वासते
मजबूर
हो
जाऊँ
सुना
है
टूटने
पर
दिल
सभी
कुछ
कर
गुजरते
हैं
मुझे
भी
तोड़
दो
इतना
कि
मैं
मशहूर
हो
जाऊँ
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SHIV SAFAR
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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तुम्हें
इक
मश्वरा
दूँ
सादगी
से
कह
दो
दिल
की
बात
बहुत
तैयारियाँ
करने
में
गाड़ी
छूट
जाती
है
Zubair Ali Tabish
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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बिछड़ोगे
तब
तुम
जानोगे
क्या
होता
है
यादों
का
दुख
Kabir Altamash
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तुम
मुझको
रोने
पर
मजबूर
कभी
मत
करना
मैं
रोया
तो
मेरे
घर
वाले
भी
रोएंँगे
Kabir Altamash
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अब
उस
सेे
यार
हरगिज़
भी
किनारा
हो
नहीं
सकता
मगर
वो
शख़्स
तो
फिर
भी
हमारा
हो
नहीं
सकता
ये
कैसे
मान
बैठे
तुम
कि
वो
अब
भी
तुम्हारा
है
तुम्हारा
है
तो
फिर
वो
क्यूँ
तुम्हारा
हो
नहीं
सकता
मैं
जिसके
वास्ते
सब
भूल
बैठा
हूँ
वो
कहती
है
सुनो
लड़के
हमारा
अब
गुज़ारा
हो
नहीं
सकता
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Kabir Altamash
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हम
ज़रा
क्या
खफा
हो
गए
आप
तो
बे-वफ़ा
हो
गए
जान
थे
आप
मेरे
कभी
जान,
लेकिन
जुदा
हो
गए
है
बहुत
ही
बड़ा
मसअला
आप
ही
मसअला
हो
गए
चाहते
थे
मुझे
और
अब
जाने
किसपर
फिदा
हो
गए
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Kabir Altamash
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हम
ज़रा
क्या
ख़फ़ा
हो
गए
आप
तो
बे-वफ़ा
हो
गए
जान
थे
आप
मेरे
कभी
जान
,
लेकिन
जुदा
हो
गए
है
बहुत
ही
बड़ा
मसअला
आप
ही
मसअला
हो
गए
चाहते
थे
मुझे
और
अब
जाने
किसपर
फ़िदा
हो
गए
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Kabir Altamash
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