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Kabir Altamash
tum mujhko rone par majboor kabhi mat karna
tum mujhko rone par majboor kabhi mat karna | तुम मुझको रोने पर मजबूर कभी मत करना
- Kabir Altamash
तुम
मुझको
रोने
पर
मजबूर
कभी
मत
करना
मैं
रोया
तो
मेरे
घर
वाले
भी
रोएंँगे
- Kabir Altamash
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मैं
ये
भी
चाहती
हूँ
तिरा
घर
बसा
रहे
और
ये
भी
चाहती
हूँ
कि
तू
अपने
घर
न
जाए
Rehana Roohi
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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इक
दिए
से
एक
कमरा
भी
बहुत
है
दिल
जलाने
से
ये
घर
रौशन
हुआ
है
Neeraj Neer
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गुमान
है
या
किसी
विश्वास
में
है
सभी
अच्छे
दिनों
की
आस
में
है
ये
कैसा
जश्न
है
घर
वापसी
का
अभी
तो
राम
ही
वनवास
में
है
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Azhar Iqbal
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उसके
इश्क़
में
बाल
बढ़ाने
वालों
सुन
लो
उसके
घर
वाले
तो
पैसा
देखेंगे
Shaad Imran
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हमारे
घर
की
दीवारों
पे
'नासिर'
उदासी
बाल
खोले
सो
रही
है
Nasir Kazmi
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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उस
को
रुख़्सत
तो
किया
था
मुझे
मालूम
न
था
सारा
घर
ले
गया
घर
छोड़
के
जाने
वाला
Nida Fazli
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तेरी
ख़ातिर
कुछ
कर
भी
सकता
है
तो
फिर
तुझ
बिन
वो
मर
भी
सकता
है
बच्चों
का
दिल
तो
बच्चा
होता
है
तुम
चीखो
मत
ये
डर
भी
सकता
है
जब
तक
तुम
लौटोगी
उस
सेे
पहले
ये
तन्हा
लड़का
मर
भी
सकता
है
जिस
सेे
प्यार
तुझे
है
ना
ऐ
लड़की
उसका
दिल
तुझ
सेे
भर
भी
सकता
है
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Kabir Altamash
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अब
उसको
भी
मेरी
आदत
है
बोल
रहा
था
जो
तू
आफ़त
है
ढूंढ
रहे
हैं
अब
भी
उनको
हम
जिनका
दिखना
यार
क़यामत
है
जिस
सेे
मुझको
यार
मोहब्बत
थी
उस
सेे
क्यूँ
मुझको
अब
नफ़रत
है
देखा
माँ
के
क़दमों
के
नीचे
नीचे
सचमुच
में
इक
जन्नत
है
इस
दुनिया
में
इक
ही
लड़की
है
जिसपर
दुनिया
भर
की
लानत
है
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Kabir Altamash
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वो
मिले
तो
पूछना
उस
सेे
कभी
तुम
मेरे
चेहरे
की
चमक
क्यूँ
खा
गई
वो
Kabir Altamash
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जिन
पर
बोझ
लदा
हो
बस
काँटों
का
जाने
क्या
होता
है
उन
पौधों
का
इक
लड़की
जो
मेरी
महबूबा
थी
मामा
हूँ
अब
मैं
उसके
बच्चों
का
अब
मैं
भी
तो
उसके
पास
नहीं
हूँ
क्या
होता
होगा
उसकी
होंठों
का
कौन
सँवारेगा
अब
उनकी
ज़ुल्फ़ें
जाने
क्या
होगा
उनकी
ज़ुल्फ़ों
का
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Kabir Altamash
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घिन
आ
रही
है
आशिक़ी
से
अब
मुझे
इस
आशिक़ी
इस
ज़िन्दगी
से
अब
मुझे
मैं
देख
लूँगा
ख़ुद
को
मुस्काते
हुए
तुम
देख
लेना
बस
ख़ुशी
से
अब
मुझे
मिलता
नहीं
जब
प्यार
मुझको
यूँँ
कभी
फिर
प्यार
क्यूँ
करना
किसी
से
अब
मुझे
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Kabir Altamash
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