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Kabir Altamash
ghin aa rahi hai aashiqi se ab mujhe
ghin aa rahi hai aashiqi se ab mujhe | घिन आ रही है आशिक़ी से अब मुझे
- Kabir Altamash
घिन
आ
रही
है
आशिक़ी
से
अब
मुझे
इस
आशिक़ी
इस
ज़िन्दगी
से
अब
मुझे
मैं
देख
लूँगा
ख़ुद
को
मुस्काते
हुए
तुम
देख
लेना
बस
ख़ुशी
से
अब
मुझे
मिलता
नहीं
जब
प्यार
मुझको
यूँँ
कभी
फिर
प्यार
क्यूँ
करना
किसी
से
अब
मुझे
- Kabir Altamash
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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तुम
इन
लबों
की
हँसी
और
ख़ुशी
पे
मत
जाना
ये
रोज़
रोज़
हमें
भी
फ़रेब
देते
हैं
Shadab Asghar
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कौन
सी
बात
कहाँ
कैसे
कही
जाती
है
ये
सलीक़ा
हो
तो
हर
बात
सुनी
जाती
है
एक
बिगड़ी
हुई
औलाद
भला
क्या
जाने
कैसे
माँ-बाप
के
होंठों
से
हँसी
जाती
है
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Waseem Barelvi
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उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
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Vikram Sharma
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उदास
लोग
इसी
बात
से
हैं
ख़ुश
कि
चलो
हमारे
साथ
हुए
हादसों
की
बात
हुई
Abhishar Geeta Shukla
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ज़मीं
पे
घर
बनाया
है
मगर
जन्नत
में
रहते
हैं
हमारी
ख़ुश-नसीबी
है
कि
हम
भारत
में
रहते
हैं
Mehshar Afridi
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वो
बे-वफ़ा
है
तो
क्या
मत
कहो
बुरा
उसको
कि
जो
हुआ
सो
हुआ
ख़ुश
रखे
ख़ुदा
उसको
Naseer Turabi
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इस
क़दर
हम
ख़ुश
रखेंगे
आपको
ससुराल
में
आपको
महसूस
होगा
जी
रहे
ननिहाल
में
दो
गुलाबों
की
तरह
है
दो
चमेली
की
तरह
फ़र्क़
बस
इतना
तुम्हारे
होंठ
में
और
गाल
में
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Tanoj Dadhich
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तू
अगर
ख़ुश
है
मेरे
रोने
में
मैं
वहाँ
बैठ
जाऊँ
कोने
में
देखते
हो
ये
ईंट
का
तकिया
एक
अर्सा
लगा
भिगोने
में
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Zahid Bashir
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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मेरी
हालत
पर
तरस
तो
खाइए
रब
हाँ
मुझे
जाना
है
हाँ
ले
जाइए
रब
Kabir Altamash
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जितने
भी
मेरे
अपने
हैं
सारे
ही
मुझपर
हँसते
हैं
डरना
क्यूँँ
हमको
मरने
से
हम
तो
हर
दिन
मर
सकते
हैं
देखो
अब
ये
मत
कहना
तुम
सारे
लड़के
इक
जैसे
हैं
सूख
गई
है
आँखें
मेरी
सोचो
हम
कितना
रोए
हैं
तुम
रस्ता
मत
रोको
मेरा
हम
तो
बस
मरने
निकले
हैं
बस
ऐसे
ही
हम
आए
थे
अच्छा
तो
अब
हम
चलते
हैं
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Kabir Altamash
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हम
ज़रा
क्या
ख़फ़ा
हो
गए
आप
तो
बे-वफ़ा
हो
गए
जान
थे
आप
मेरे
कभी
जान
,
लेकिन
जुदा
हो
गए
है
बहुत
ही
बड़ा
मसअला
आप
ही
मसअला
हो
गए
चाहते
थे
मुझे
और
अब
जाने
किसपर
फ़िदा
हो
गए
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Kabir Altamash
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मैं
तुझे
क्या
क्या
बताऊं
छोड़ने
वाली
बाद
तेरे
मैं
कई
बरसों
तलक
रोया
Kabir Altamash
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मुझको
ख़ुद
से
बहुत
डर
लगता
है
कोई
दिन
मार
न
डालूं
ख़ुद
को
Kabir Altamash
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