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Kabir Altamash
maine chaaha hai har din aisa ho
maine chaaha hai har din aisa ho | मैंने चाहा है हर दिन ऐसा हो
- Kabir Altamash
मैंने
चाहा
है
हर
दिन
ऐसा
हो
मैं
जो
कुछ
भी
चाहूँ
वो
पूरा
हो
दुनिया
वाले
तो
कुछ
भी
कहते
हैं
लेकिन
तुम
लड़का
सच
में
अच्छा
हो
दुनिया
में
सब
कुछ
अच्छा
है
लेकिन
मौला
कोई
तो
मेरे
जैसा
हो
अब
मैं
अपना
दुख
किस
सेे
बाटूँगा
अब
तुम
ख़ुद
इस
दुनिया
में
तन्हा
हो
- Kabir Altamash
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ख़ुशरंग
नज़र
आता
है
जाज़िब
नहीं
लगता
माहौल
मेरे
दिल
से
मुख़ातिब
नहीं
लगता
मैं
भी
नहीं
हर
शे'र
में
मौजूद
ये
सच
है
ग़ालिब
भी
हर
इक
शे'र
में
ग़ालिब
नहीं
लगता
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Obaid Azam Azmi
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या'नी
तुम
वो
हो
वाक़ई
हद
है
मैं
तो
सच-मुच
सभी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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तुम
मिरी
ज़िंदगी
हो
ये
सच
है
ज़िंदगी
का
मगर
भरोसा
क्या
Bashir Badr
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तितली
वो
ही
फूल
चुनेगी
जिस
पर
उसका
दिल
आए
इक
लड़की
के
पीछे
इतनी
मारामारी
ठीक
नहीं
Shubham Seth
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तू
है
मुस्लिम
वो
पण्डित
की
बेटी
है
उस
लड़की
पर
तेरा
मरना
ठीक
नहीं
Shadab Asghar
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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कुछ
तो
मिल
जाए
लब-ए-शीरीं
से
ज़हर
खाने
की
इजाज़त
ही
सही
Arzoo Lakhnavi
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हमको
हकीम
ने
ही
किया
ठीक
दोस्तों
हम
पर
किसी
के
लम्स
ने
जादू
नहीं
किया
Tanoj Dadhich
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लहजा
ही
थोड़ा
तल्ख़
है
दुनिया
के
सामने
वैसे
तो
ठीक
ठाक
हूँ
मैं
बोल-चाल
में
Ankit Maurya
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हम
अम्न
चाहते
हैं
मगर
ज़ुल्म
के
ख़िलाफ़
गर
जंग
लाज़मी
है
तो
फिर
जंग
ही
सही
Sahir Ludhianvi
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तुम्हारे
दिल
से
निकल
कर
पछता
रहे
हैं
हम
सितम
तो
ये
है
कि
दिल
को
समझा
रहे
हैं
हम
कि
आओ
मुझको
चले
जाओ
तुम
कहीं
ले
कर
बहुत
अपने
आप
से
अब
उकता
रहे
हैं
हम
तुम्हें
क्या
मालूम
तुम
तो
अब
आई
हो
लड़की
किसी
लड़की
के
लिए
ही
क्या
क्या
रहे
हैं
हम
तुम्हारा
ये
प्यार
हम
सेे
क्या
क्या
कराएगा
ख़ुदा
ने
दी
है
ज़बाँ
पर
तुतला
रहे
हैं
हम
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Kabir Altamash
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कभी
जब
ख़सारा
करूँँगा
तुम्हीं
को
पुकारा
करूँँगा
करूँँंगा
मुहब्बत
अगर
मैं
तुम्हीं
से
दुबारा
करूँँगा
अगर
मर
गए
आप
भी
तो
मैं
कैसे
गुज़ारा
करूँँगा
कभी
चूम
लूंगा
तुझे
मैं
कभी
बस
इशारा
करूँँगा
मुझे
भी
सही
से
पता
था
कि
हर
बार
हारा
करूँँगा
मुहब्बत
तुम्हीं
हो
तुम्हीं
को
ग़ज़ल
में
उतारा
करूँँगा
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Kabir Altamash
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जब
तेरे
बच्चे
मेरी
नज़्म
सुनाएंगे
तुझको
तब
तू
समझेगी
तूने
क्या
खोया
था
ऐ
लड़की
Kabir Altamash
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कितने
ग़म
हैं
यार
मुझे
अब
कौन
करेगा
प्यार
मुझे
अब
कोई
करता
था
ठीक
मुझे
करता
है
बीमार
मुझे
अब
मैं
हूँ
ना,
सब
कहते
थे
कहते
हैं
लाचार
मुझे
अब
तारीफ
सुनी
जिन
कानों
ने
सुनती
हैं
बेकार
मुझे
अब
छोड़ा
था
कभी
मैंने
घर
को
छोड़
दिया
घर
-
बार
मुझे
अब
लगता
था
सब
अपने
ही
हैं
लगते
हैं
मक्कार
मुझे
अब
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Kabir Altamash
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मेरे
पास
तुम्हारे
जैसी
बस
इक
तुम
हो
अच्छे
सब
हैं
सब
सेे
अच्छी
बस
इक
तुम
हो
कहने
को
दुनिया
में
सारे
हैं
अपने
ही
लेकिन
सच
पूछो
तो
अपनी
बस
इक
तुम
हो
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Kabir Altamash
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