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Kabir Altamash
mere paas tumhaare jaisi bas ik tum ho
mere paas tumhaare jaisi bas ik tum ho | मेरे पास तुम्हारे जैसी बस इक तुम हो
- Kabir Altamash
मेरे
पास
तुम्हारे
जैसी
बस
इक
तुम
हो
अच्छे
सब
हैं
सब
सेे
अच्छी
बस
इक
तुम
हो
कहने
को
दुनिया
में
सारे
हैं
अपने
ही
लेकिन
सच
पूछो
तो
अपनी
बस
इक
तुम
हो
- Kabir Altamash
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तू
तो
सच
में
ही
झूठा
निकला
यारा
तू
तो
कहता
था
हम
मिलते
रहेंगे
Vicky Kumar Rajak
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धोखा
है
इक
फ़रेब
है
मंज़िल
का
हर
ख़याल
सच
पूछिए
तो
सारा
सफ़र
वापसी
का
है
Rajesh Reddy
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सच
घटे
या
बढ़े
तो
सच
न
रहे
झूट
की
कोई
इंतिहा
ही
नहीं
Krishna Bihari Noor
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अगर
सच
इतना
ज़ालिम
है
तो
हम
से
झूट
ही
बोलो
हमें
आता
है
पतझड़
के
दिनों
गुल-बार
हो
जाना
Ada Jafarey
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इतने
अफ़सुर्दा
नहीं
हैं
हम
कि
कर
लें
ख़ुद-कुशी
और
न
इतने
ख़ुश
कि
सच
में
मरने
की
ख़्वाहिश
न
हो
Charagh Sharma
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सच
बताओ
कि
सच
यही
है
क्या
साँस
लेना
ही
ज़िंदगी
है
क्या
कुछ
नया
काम
कर
नई
लड़की
इश्क़
करना
है
बावली
है
क्या
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Vikram Gaur Vairagi
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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हमने
जिम्मेदारी
दी
है
देश
चलाने
की
फेल
हुए
तो
उनको
लानत
भी
हम
ही
देंगे
Atul K Rai
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या'नी
तुम
वो
हो
वाक़ई
हद
है
मैं
तो
सच-मुच
सभी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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ज़माने
ने
ग़लत
को
सच
कहा
है
ज़माने
की
ख़राबी
है
हमीं
से
Meem Alif Shaz
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याद
नहीं
क्या
तुमको
मेरे
रोने
पर
रोती
थी
तुम
भी
क्या
अब
तुम
को
मेरे
रोने
पर
कोई
फ़र्क़
नहीं
पड़ता
Kabir Altamash
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वहीं
पर
इक
जवानी
चल
रही
है
जहाँ
कोई
जवानी
ढल
रही
है
मैं
हूँ
मिट्टी
मगर
हूँ
उसके
हाथों
मुझे
वो
अपने
हाथों
मल
रही
है
तुम्हें
अब
वास्ता
क्यूँ
होगा
हम
सेे
तुम्हारी
ज़िन्दगी
तो
चल
रही
है
मुझे
तुझ
सेे
मुहब्बत
गर
नहीं
थी
मुझे
तेरी
कमी
क्यूँ
खल
रही
है
उसे
कुछ
मत
कहो
मेरे
रक़ीबों
वो
मेरे
मस'अलों
का
हल
रही
है
ये
धोका
बे-वफ़ाई
और
नफ़रत
वो
हर
इक
काम
में
अव्वल
रही
है
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Kabir Altamash
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इक
बेचैनी
सी
है
मन
में
क्या
होगा
ये
रब
जाने
यार
मिरे
कोई
पूछो
रब
से
वो
तो
है
सब
जाने
Kabir Altamash
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मैं
झट
से
कह
देता
हूँ
जो
मन
होता
है
बात
छुपाने
वाला
तो
दुश्मन
होता
है
तेरे
आने
से
जागी
है
मेरी
क़िस्मत
जो
धीरे
होता
था
वो
फ़ौरन
होता
है
नौ
से
चल
कर
रफ़्ता
रफ़्ता
दो
बजते
हैं
तब
जा
कर
उस
देवी
का
दर्शन
होता
है
क्यूँ
ये
बात
नहीं
समझी
है
दुनिया
अब
तक
राधा
के
होने
से
ही
मोहन
होता
है
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Kabir Altamash
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जो
मुझको
अच्छा
करने
वाला
है
इक
दिन
वो
तन्हा
करने
वाला
है
वो
बस
इक
तुझको
अपना
कहती
है
तू
किसको
अपना
करने
वाला
है
लोगों
ने
आख़िर
कब
ये
सोचा
था
वो
ऐसा
धोखा
करने
वाला
है
इक
दिन
तू
लानत
भेजेगा
उसपर
तू
जिस
पे
भरोसा
करने
वाला
है
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Kabir Altamash
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