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Kabir Altamash
main jhat se kah deta hooñ jo man hota hai
main jhat se kah deta hooñ jo man hota hai | मैं झट से कह देता हूँ जो मन होता है
- Kabir Altamash
मैं
झट
से
कह
देता
हूँ
जो
मन
होता
है
बात
छुपाने
वाला
तो
दुश्मन
होता
है
तेरे
आने
से
जागी
है
मेरी
क़िस्मत
जो
धीरे
होता
था
वो
फ़ौरन
होता
है
नौ
से
चल
कर
रफ़्ता
रफ़्ता
दो
बजते
हैं
तब
जा
कर
उस
देवी
का
दर्शन
होता
है
क्यूँ
ये
बात
नहीं
समझी
है
दुनिया
अब
तक
राधा
के
होने
से
ही
मोहन
होता
है
- Kabir Altamash
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किताब-ए-मुक़द्दर
में
रांझा
दिवाना
मगर
हीर
बेहद
सयानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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ख़ुश
रहते
हैं
हँस
सकते
हैं
भोले
भाले
होते
हैं
वो
जो
शे'र
नहीं
कहते
हैं
क़िस्मत
वाले
होते
हैं
पीना
अच्छी
बात
नहीं
है
आते
हैं
समझाने
दोस्त
और
ढलते
ही
शाम
उन्हें
फिर
हमीं
सँभाले
होते
हैं
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Vineet Aashna
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अपनी
कि़स्मत
में
ही
जब
इश्क़
नहीं
है
यारो
किसलिए
अश्क-ए-लहू
इश्क़
में
जाया
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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वहम
होता
है
कि
छूने
से
सँवर
जाएँगी
सोचता
हूँ
जो
मुक़द्दर
मिरा
ज़ुल्फ़ें
तेरी
Neeraj Neer
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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कोई
भी
रोक
न
पाता,
गुज़र
गया
होता
मेरा
नसीब-ए-मोहब्बत
सँवर
गया
होता
न
आईं
होती
जो
बेग़म
मेरी
अयादत
को
मैं
अस्पताल
की
नर्सों
पर
मर
गया
होता
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Paplu Lucknawi
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किसी
को
साल-ए-नौ
की
क्या
मुबारकबाद
दी
जाए
कैलन्डर
के
बदलने
से
मुक़द्दर
कब
बदलता
है
Aitbar Sajid
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कभी
मैं
अपने
हाथों
की
लकीरों
से
नहीं
उलझा
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
का
लिक्खा
भी
बदलता
है
Bashir Badr
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न
हुआ
नसीब
क़रार-ए-जाँ
हवस-ए-क़रार
भी
अब
नहीं
तिरा
इंतिज़ार
बहुत
किया
तिरा
इंतिज़ार
भी
अब
नहीं
तुझे
क्या
ख़बर
मह-ओ-साल
ने
हमें
कैसे
ज़ख़्म
दिए
यहाँ
तिरी
यादगार
थी
इक
ख़लिश
तिरी
यादगार
भी
अब
नहीं
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Jaun Elia
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वो
लड़की
मेरे
दिल
में
अब
भी
आती
है
जिसके
आ
जाने
से
जान
चली
जाती
है
इक
बात
बताओ
ऐ
धोखा
देने
वाली
तेरी
याद
मुझे
अब
तक
क्यूँँ
तड़पाती
है
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Kabir Altamash
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होते
होते
ऐसा
भी
होगा
इक
दिन
मेरा
सपना
पूरा
भी
होगा
इक
दिन
कि
ख़राब
हुआ
है
तो
होने
दो
जानी
रिश्ता
अपना
अच्छा
भी
होगा
इक
दिन
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Kabir Altamash
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तुम
सेे
मिल
कर
ये
कहना
है
मुझको
साथ
तुम्हारे
ही
रहना
है
मुझको
एक
नदी
हो
तुम
उस
गंगा
जैसी
तुझ
में
अब
घुल
कर
बहना
है
मुझको
बाद
तुम्हारे
मैं
मरने
जाऊँगा
बाद
तुम्हारे
क्यूँ
रहना
है
मुझको
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Kabir Altamash
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और
मैं
जाऊँँ
कहाँ
अब
दिल
लगाने
के
लिए
मैं
कमाने
जा
रहा
हूॅं
तुमको
पाने
के
लिए
जा
रहे
हैं
तो
चले
जाऍं
रुके
क्यूँ
हैं
यहाॅं
आज
आए
भी
थे
तो
बस
आप
जाने
के
लिए
जो
बताना
था
वही
मुझको
बताया
तू
नहीं
और
क्या
ही
रह
गया
मुझको
बताने
के
लिए
मैं
तुम्हारे
बाद
कैसे
मुस्कुराऊँगा
सुनो
मैं
तुम्हीं
को
देखता
हूॅं
मुस्कुराने
के
लिए
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Kabir Altamash
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मैं
तुझे
क्या
क्या
बताऊं
छोड़ने
वाली
बाद
तेरे
मैं
कई
बरसों
तलक
रोया
Kabir Altamash
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