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Kabir Altamash
tumhaare dil se nikal kar pachta rahe hain ham
tumhaare dil se nikal kar pachta rahe hain ham | तुम्हारे दिल से निकल कर पछता रहे हैं हम
- Kabir Altamash
तुम्हारे
दिल
से
निकल
कर
पछता
रहे
हैं
हम
सितम
तो
ये
है
कि
दिल
को
समझा
रहे
हैं
हम
कि
आओ
मुझको
चले
जाओ
तुम
कहीं
ले
कर
बहुत
अपने
आप
से
अब
उकता
रहे
हैं
हम
तुम्हें
क्या
मालूम
तुम
तो
अब
आई
हो
लड़की
किसी
लड़की
के
लिए
ही
क्या
क्या
रहे
हैं
हम
तुम्हारा
ये
प्यार
हम
सेे
क्या
क्या
कराएगा
ख़ुदा
ने
दी
है
ज़बाँ
पर
तुतला
रहे
हैं
हम
- Kabir Altamash
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तुम्हारा
नाम
लिया
था
कभी
मोहब्बत
से
मिठास
उस
की
अभी
तक
मेरी
ज़बान
में
है
Abbas Dana
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ख़ुशबू
से
किस
ज़बान
में
बातें
करेंगे
लोग
महफ़िल
में
ये
सवाल
तुझे
देख
कर
हुआ
Mansoor Usmani
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मैं
हिंदी
और
उर्दू
को
अलग
कैसे
करूँँ
यारों
अगर
साँसें
हटा
दूँ
तो
बदन
में
कुछ
नहीं
बचता
Umesh Maurya
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वो
जो
ख़्वाब
थे
मेरे
ज़ेहन
में
न
मैं
कह
सका
न
मैं
लिख
सका
कि
ज़बाँ
मिली
तो
कटी
हुई
जो
क़लम
मिला
तो
बिका
हुआ
Iqbal Ashhar
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फिर
चाहे
तो
न
आना
ओ
आन
बान
वाले
झूटा
ही
वअ'दा
कर
ले
सच्ची
ज़बान
वाले
Arzoo Lakhnavi
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हफ़ीज़'
अपनी
बोली
मोहब्बत
की
बोली
न
उर्दू
न
हिन्दी
न
हिन्दोस्तानी
Hafeez Jalandhari
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तेरे
एहसास
को
ख़ुशबू
बनाते
जो
बस
चलता
तुझे
उर्दू
बनाते
यक़ीनन
इस
से
तो
बेहतर
ही
होती
वो
इक
दुनिया
जो
मैं
और
तू
बनाते
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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लिपट
जाता
हूँ
माँ
से
और
मौसी
मुस्कुराती
है
मैं
उर्दू
में
ग़ज़ल
कहता
हूँ
हिंदी
मुस्कुराती
है
Munawwar Rana
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जो
इक
ख़ुदा
नहीं
मिलता
तो
इतना
मातम
क्यूँँ
यहाँ
तो
कोई
मिरा
हम-ज़बाँ
नहीं
मिलता
Kaifi Azmi
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जितना
कड़वा
उसका
लहज़ा
हो
रहा
है
उतना
मेरा
प्यार
गहरा
हो
रहा
है
Harsh saxena
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तुमको
देखा
तो
ये
मालूम
हुआ
मुझको
तुम
सेे
मिलती
आई
है
यार
हवा
मुझको
अब
मैं
क्योंकर
न
उदास
रहूँ
यारों
बोलो
मैंने
जिसको
चाहा
वो
छोड़
गया
मुझको
मुझको
क्या
लेना
उस
रब
से
जो
सबका
है
बस
तुम
ही
लगते
हो
अब
यार
ख़ुदा
मुझको
एक
तरफ़
दुनिया
थी
और
एक
तरफ़
मैं
थी
उस
शहज़ादे
ने
अपने
आप
चुना
मुझको
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Kabir Altamash
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मैंने
चाहा
है
हर
दिन
ऐसा
हो
मैं
जो
कुछ
भी
चाहूँ
वो
पूरा
हो
दुनिया
वाले
तो
कुछ
भी
कहते
हैं
लेकिन
तुम
लड़का
सच
में
अच्छा
हो
दुनिया
में
सब
कुछ
अच्छा
है
लेकिन
मौला
कोई
तो
मेरे
जैसा
हो
अब
मैं
अपना
दुख
किस
सेे
बाटूँगा
अब
तुम
ख़ुद
इस
दुनिया
में
तन्हा
हो
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Kabir Altamash
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तुम
सब
कहते
हो
दीवाना
मुझको
कैसा
दीवाना
समझाना
मुझको
मुझको
बर्बाद
करो
मालिक
फिर
से
फिर
से
है
रोना
पछताना
मुझको
दुनिया
में
तुम
ही
सब
कुछ
थोड़ी
हो
अब
और
बहुत
कुछ
है
पाना
मुझको
दम
घुटता
है
मेरा
मेरे
घर
में
तुम
जब
आओ
तो
ले
जाना
मुझको
जो
अब
शाइर
है
तेरा
'आशिक़
था
ऐ
लड़की
तू
ने
पहचाना
मुझको
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Kabir Altamash
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कितनी
ही
शर्म
की
बात
है
कि
तुम
मेरे
होते
हुए
भी
उदास
हो
Kabir Altamash
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तेरे
चुप
रहने
से
हर
पौधा
सूख
गया
है
तुझको
मालूम
नहीं
पौधों
का
पानी
है
तू
Kabir Altamash
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