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Kabir Altamash
kitne gam hain yaar mujhe ab
kitne gam hain yaar mujhe ab | कितने ग़म हैं यार मुझे अब
- Kabir Altamash
कितने
ग़म
हैं
यार
मुझे
अब
कौन
करेगा
प्यार
मुझे
अब
कोई
करता
था
ठीक
मुझे
करता
है
बीमार
मुझे
अब
मैं
हूँ
ना,
सब
कहते
थे
कहते
हैं
लाचार
मुझे
अब
तारीफ
सुनी
जिन
कानों
ने
सुनती
हैं
बेकार
मुझे
अब
छोड़ा
था
कभी
मैंने
घर
को
छोड़
दिया
घर
-
बार
मुझे
अब
लगता
था
सब
अपने
ही
हैं
लगते
हैं
मक्कार
मुझे
अब
- Kabir Altamash
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मैंने
अब
तो
तन्हाई
को
भी
छोड़
दिया
इतना
तन्हा
कोई
ख़ुद
को
करता
है
क्या?
Kabir Altamash
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अब
ख़ुद
से
मिल
कर
दो
तीन
सवाल
मुझे
करने
हैं
क्या
हूँ
मैं
?
क्या
करना
है
मुझको?
क्या
करता
हूँ
मैं?
Kabir Altamash
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घिन
आ
रही
है
आशिक़ी
से
अब
मुझे
इस
आशिक़ी
इस
ज़िन्दगी
से
अब
मुझे
मैं
देख
लूँगा
ख़ुद
को
मुस्काते
हुए
तुम
देख
लेना
बस
ख़ुशी
से
अब
मुझे
मिलता
नहीं
जब
प्यार
मुझको
यूँँ
कभी
फिर
प्यार
क्यूँ
करना
किसी
से
अब
मुझे
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तुमको
है
बस
आमों
का
दुख
हमको
है
सब
पेड़ों
का
दुख
तुम
तो
इक
लड़की
हो
पगली
तुम
क्या
जानो
लड़कों
का
दुख
ऐ
रस्तों
पर
चलने
वालों
कब
समझोगे
रस्तों
का
दुख
जिन
लम्हों
में
टूट
गया
मैं
मुझको
है
उन
लम्हों
का
दुख
ऐ
ब्लूटूथ
लगाने
वाले
तुम
क्या
जानो
बहरों
का
दुख
तुमको
है
बस
इक
अपना
दुख
रब
को
है
हम
बंदों
का
दुख
उसको
चूम
नहीं
पाया
मैं
मुझ
सेे
पूछो
होंठों
का
दुख
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अब
उसको
भी
मेरी
आदत
है
बोल
रहा
था
जो
तू
आफ़त
है
ढूंढ
रहे
हैं
अब
भी
उनको
हम
जिनका
दिखना
यार
क़यामत
है
जिस
सेे
मुझको
यार
मोहब्बत
थी
उस
सेे
क्यूँ
मुझको
अब
नफ़रत
है
देखा
माँ
के
क़दमों
के
नीचे
नीचे
सचमुच
में
इक
जन्नत
है
इस
दुनिया
में
इक
ही
लड़की
है
जिसपर
दुनिया
भर
की
लानत
है
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