qabr pe phool khila aahista | क़ब्र पे फूल खिला आहिस्ता

  - Mah Talat Zahidi
क़ब्रपेफूलखिलाआहिस्ता
ज़ख़मसेख़ूनबहाआहिस्ता
ध्यानकेज़ीनेपेयादोंनेफिर
देखिएपाँवधराआहिस्ता
कहनेकोवक़्तगुज़रताहीथा
औरजगबीतगयाआहिस्ता
काटेसेरातनहींकटतीथी
फिरभीदिनहीगयाआहिस्ता
आँखमेंचेहराबसारहताहै
इसलिएअश्कगिराआहिस्ता
मैंजोमुद्दतमेंहँसीदिलनेकहा
क्यातुझेसब्रमिलाआहिस्ता
रोकेमैंनेयेकहादुनियाहै
ग़मकोसहनाहीपड़ाआहिस्ता
  - Mah Talat Zahidi
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