ik parinda sar-e-deewaar bhi baaki na raha | इक परिंदा सर-ए-दीवार भी बाक़ी न रहा

  - Mah Talat Zahidi
इकपरिंदासर-ए-दीवारभीबाक़ीरहा
अबतोपर्वाज़कादीदारभीबाक़ीरहा
हब्सऐसाथाकिसाएमेंसुलगउट्ठेगुलाब
लूचलीऐसीकिगुलज़ारभीबाक़ीरहा
लोगदमसाधगएख़ौफ़नेघेराऐसे
कोईअंदेशा-ए-बे-कारभीबाक़ीरहा
हादिसाक्याहुआबिखरेहुएसन्नाटेमें
लफ़्ज़सेरिश्ता-ए-इज़हारभीबाक़ीरहा
एकवहशतहीमताअ-ए-ग़म-ए-जानाँनिकली
लुत्फ़-ए-दिलदारी-ए-ग़म-ख़्वारभीबाक़ीरहा
जाँसिसकतीरहीख़्वाहिशकेबयाबानोंमें
शौक़-ए-हर-लहज़ाकाआज़ारभीबाक़ीरहा
दिलभीयादोंकीकड़ीधूपमेंकुम्हलासागया
औरकोईसाया-ए-दीवारभीबाक़ीरहा
ऐसीवीरानीहैख़ुदमौतभीकतराकेचली
कोईमरनेकासज़ा-वारभीबाक़ीरहा
  - Mah Talat Zahidi
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