vehshat bharii raaton ko kinaara nahin milta | वहशत भरी रातों को किनारा नहीं मिलता

  - Mah Talat Zahidi
वहशतभरीरातोंकोकिनारानहींमिलता
दिलडूबचलासुब्हकातारानहींमिलता
मिलतेहैंबहुतयूँँतोजोआग़ोश-कुशाहो
दिलकेलिएवोदर्दकाधारानहींमिलता
इसअहदकीतस्वीरमेंअपनाभीलहूहै
ढूँडेसेमगरनामहमारानहींमिलता
क़ुदरतकाकरमहोतोअलगबातहैवर्ना
मुश्किलमेंतोअपनोंकासहारानहींमिलता
सदियाँहैंफ़क़तएकहीलम्हेकीकहानी
लम्हाजिसेखोदेवोदोबारानहींमिलता
  - Mah Talat Zahidi
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