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Madan pal
din aa ga.e shabaab ke aanchal sambhaaliye
din aa ga.e shabaab ke aanchal sambhaaliye | दिन आ गए शबाब के आँचल सँभालिए
- Madan pal
दिन
आ
गए
शबाब
के
आँचल
सँभालिए
होने
लगी
है
शहर
में
हलचल
सँभालिए
चलिए
सँभल
सँभल
के
कठिन
राह-ए-इश्क़
है
नाज़ुक
बड़ी
है
आप
की
पायल
सँभालिए
सज-धज
के
आप
निकले
सर-ए-राह
ख़ैर
हो
टकरा
न
जाए
आप
का
पागल
सँभालिए
घर
से
न
जाओ
दूर
किसी
अजनबी
के
साथ
बरसेंगे
ज़ोर
ज़ोर
से
बादल
सँभालिए
- Madan pal
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तेरी
आवाज़
को
इस
शहर
की
लहरें
तरसती
हैं
ग़लत
नंबर
मिलाता
हूँ
तो
पहरों
बात
होती
है
Ghulam Mohammad Qasir
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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अब
तो
गाँवो
में
भी
ईंटों
के
महल
बसने
लगे
गाँव
की
मिट्टी
से
वो
ख़ुशबू
रूहानी
ख़ो
गई
Divy Kamaldhwaj
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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दूर
साए
से
मेरे
कहीं
रहती
हो
या'नी
इस
शहर
में
अब
नहीं
रहती
हो
लौट
आया
हूँ
इक
दोस्त
के
घर
से
मैं
जब
ये
देखा
कि
तुम
भी
वहीं
रहती
हो
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Dileep Kumar
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हमारे
शहर
के
लोगों
का
अब
अहवाल
इतना
है
कभी
अख़बार
पढ़
लेना
कभी
अख़बार
हो
जाना
Ada Jafarey
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किसी
गली
में
किराए
पे
घर
लिया
उसने
फिर
उस
गली
में
घरों
के
किराए
बढ़ने
लगे
Umair Najmi
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'अल्वी'
ये
मो'जिज़ा
है
दिसम्बर
की
धूप
का
सारे
मकान
शहर
के
धोए
हुए
से
हैं
Mohammad Alvi
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जवाँ
है
रात
साक़िया
शराब
ला
शराब
ला
ज़रा
सी
प्यास
तो
बुझा
शराब
ला
शराब
ला
तिरे
शबाब
पर
सदा
करम
रहे
बहार
का
तुझे
लगे
मिरी
दु'आ
शराब
ला
शराब
ला
यहाँ
कोई
न
जी
सका
न
जी
सकेगा
होश
में
मिटा
दे
नाम
होश
का
शराब
ला
शराब
ला
तिरा
बड़ा
ही
शुक्रिया
पिलाए
जा
पिलाए
जा
न
ज़िक्र
कर
हिसाब
का
शराब
ला
शराब
ला
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Madan pal
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आज
कल
आप
साथ
चलते
नहीं
इस
लिए
लोग
हम
से
जलते
नहीं
कैसे
ग़ज़लों
की
रुत
जवाँ
होगी
जब
निगाहों
के
तीर
चलते
नहीं
तुम
को
दुनिया
कहेगी
दीवाना
रुत
बदलती
है
तुम
बदलते
नहीं
शहरों
शहरों
हमारा
चेहरा
है
और
हम
घर
से
भी
निकलते
नहीं
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Madan pal
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