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Madan pal
aaj kal aap saath chalte nahin
aaj kal aap saath chalte nahin | आज कल आप साथ चलते नहीं
- Madan pal
आज
कल
आप
साथ
चलते
नहीं
इस
लिए
लोग
हम
से
जलते
नहीं
कैसे
ग़ज़लों
की
रुत
जवाँ
होगी
जब
निगाहों
के
तीर
चलते
नहीं
तुम
को
दुनिया
कहेगी
दीवाना
रुत
बदलती
है
तुम
बदलते
नहीं
शहरों
शहरों
हमारा
चेहरा
है
और
हम
घर
से
भी
निकलते
नहीं
- Madan pal
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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क्यूँँ
चलते
चलते
रुक
गए
वीरान
रास्तो
तन्हा
हूँ
आज
मैं
ज़रा
घर
तक
तो
साथ
दो
Adil Mansuri
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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तुम
अगर
साथ
देने
का
वा'दा
करो
मैं
यूँँही
मस्त
नग़्में
लुटाता
रहूँ
तुम
मुझे
देख
कर
मुस्कुराती
रहो
मैं
तुम्हें
देख
कर
गीत
गाता
रहूँ
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Sahir Ludhianvi
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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जवाँ
है
रात
साक़िया
शराब
ला
शराब
ला
ज़रा
सी
प्यास
तो
बुझा
शराब
ला
शराब
ला
तिरे
शबाब
पर
सदा
करम
रहे
बहार
का
तुझे
लगे
मिरी
दु'आ
शराब
ला
शराब
ला
यहाँ
कोई
न
जी
सका
न
जी
सकेगा
होश
में
मिटा
दे
नाम
होश
का
शराब
ला
शराब
ला
तिरा
बड़ा
ही
शुक्रिया
पिलाए
जा
पिलाए
जा
न
ज़िक्र
कर
हिसाब
का
शराब
ला
शराब
ला
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Madan pal
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दिन
आ
गए
शबाब
के
आँचल
सँभालिए
होने
लगी
है
शहर
में
हलचल
सँभालिए
चलिए
सँभल
सँभल
के
कठिन
राह-ए-इश्क़
है
नाज़ुक
बड़ी
है
आप
की
पायल
सँभालिए
सज-धज
के
आप
निकले
सर-ए-राह
ख़ैर
हो
टकरा
न
जाए
आप
का
पागल
सँभालिए
घर
से
न
जाओ
दूर
किसी
अजनबी
के
साथ
बरसेंगे
ज़ोर
ज़ोर
से
बादल
सँभालिए
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Madan pal
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