saahabo manzil-e-jaanaan ki taraf jaana mat | साहबो मंज़िल-ए-जानाँ की तरफ़ जाना मत

  - M Kothiyavi Rahi
साहबोमंज़िल-ए-जानाँकीतरफ़जानामत
औरजानातोकहानीकोईदोहरानामत
गुलखिलादेगामहकतेहुएचेहरोंकातिलिस्म
शहर-ए-आईनादिल-ए-ज़ारकोदिखलानामत
मुझकोचाहाहैतोबख़्शोमिरीचाहतकोदवाम
बनकेरहजानाढलीरातकाअफ़्सानामत
वस्लकीचाहमेंरुकनाकिसीजिस्मकेपास
दौलत-ए-हिज्रकोसौदाइयोठुकरानामत
सर-बुरीदासीगुज़रजानाशहीदोंकीतरह
तितलियोदिलकेदबिस्ताँमेंठहरजानामत
उल्फ़तेंसबकोमुयस्सरनहींहोतींप्यारे
तिश्नालम्होंकीमुलाक़ातसेउकतानामत
मक़्तल-ए-इश्क़अबकूचा-ए-क़ातिल'राही'
शहर-ए-बे-ख़्वाबमेंजातेहुएघबरानामत
  - M Kothiyavi Rahi
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