yaas makaan-e-dil se nikal kar kone kone jalne waali | यास मकान-ए-दिल से निकल कर कोने कोने जलने वाली

  - M Kothiyavi Rahi
यासमकान-ए-दिलसेनिकलकरकोनेकोनेजलनेवाली
दरमाँदासीलौटआईहैरातहैशायदढलनेवाली
तुमकोहमारीचाहनहींहैजबसेयेविश्वासहुआहै
हरतहरीरजलाडालीहैसोचहैरूपबदलनेवाली
चाँदकीख़ुद्दारीसेमैंअबदर्स-ए-ख़ुद-आगहीलेताहूँ
वर्नायेमायूसीकीज़ुल्मतसदियोंसेथीबदलनेवाली
गीतोंकोदफ़नादोयहींपरचीख़ोंकेउस्लूबजन्मदो
हंगामोंकीरीतयहीहैऔरयहीहैचलनेवाली
कैसेकैसेसाहिब-ए-नज़राँसर-ब-गरेबाँघूमरहेहैं
आजहैजानेकिसकीसवारीफ़नकेमकाँसेनिकलनेवाली
  - M Kothiyavi Rahi
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