uqaab-e-fikr akela hai barf-zaaron men | उक़ाब-ए-फ़िक्र अकेला है बर्फ़-ज़ारों में

  - M Kothiyavi Rahi
उक़ाब-ए-फ़िक्रअकेलाहैबर्फ़-ज़ारोंमें
किचाँदजाड़ेकाजैसेलरज़तेतारोंमें
वोआँखनोचदेजिसकोभरीबहारोंमें
लहूकारंगनज़रआएआबशारोंमें
चलाहैक़ाफ़िला-ए-आशिक़ाँकिशोला-रुख़ाँ
दबीदबीसीहैंचिंगारियाँग़ुबारोंमें
सँभलगयामिरागिरताबदनउठाकेतुझे
मैंफिरचलाहूँफिसलतेहुएदयारोंमें
सुकूत-ए-फ़िक्रकेउनवाँपेबातचलनिकली
इकऐसाशे'रपढ़आएहैंशहर-यारोंमें
  - M Kothiyavi Rahi
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