fusoon kar gaii raat paagal hawa | फ़ुसूँ कर गई रात पागल हवा

  - M Kothiyavi Rahi
फ़ुसूँकरगईरातपागलहवा
उड़ालेगईसुर्ख़आँचलहवा
हुईजिसघड़ीधूलसेदोस्ती
बनीदश्त-ए-ग़ुर्बतमेंबादलहवा
मुझेज़िंदगीइकगुलिस्ताँलगे
दिखाचलकेअबउसकोजंगलहवा
जलादेइरादोंकेतूफ़ानको
बुझादेअगरतेरीमशअ'लहवा
सड़कपरबदनइकपड़ादेखकर
चलीघूमकरसू-ए-मक़्तलहवा
ख़ुशीकेचराग़ोंनेसमझाहैकब
तुझेशब-ए-ग़मकीबोझलहवा
लहूरातकीरातगिरतारहा
रहीरातकीरातजल-थलहवा
  - M Kothiyavi Rahi
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