daraaz-qamat daraaz-gesoo ajeeb sa ik nigaar tha vo | दराज़-क़ामत दराज़-गेसू अजीब सा इक निगार था वो

  - M Kothiyavi Rahi
दराज़-क़ामतदराज़-गेसूअजीबसाइकनिगारथावो
गुलोंकीबागउसकेहाथमेंथीहवाओंपरजबसवारथावो
जुनूँथाबनकरलहूरगोंमेंकिरातदिनदौड़तेथेलम्हे
थकेथेवोजोरुकगएथेमिरेलिएबे-क़रारथावो
मिरेख़ुदाहुस्नकेदफ़ीनेकोमतख़ज़ानेकामर्तबादे
किपाकेजोउसकोख़ुशबहुतथागँवाकेकलअश्क-बारथावो
उबलपड़ेनफ़रतोंकेसोतेकिहोगईख़ुश्कझीलग़मकी
शिकस्त-ख़ुर्दासामुँहछुपाएजानेकिसकाशिकारथावो
कभीकभीजोसुनागयाथाकहींकहींजोपढ़ागयाथा
किताबमेंबंदहोचुकाहैइकउम्रकाशाहकारथावो
वोदोस्तोंदुश्मनोंकाप्याराफिरातमामउम्रमारामारा
सुनाहैकलग़मनेमारडालाकिजिसकादेरीनायारथावो
अजीबराहीथारेग-ज़ारोंमेंप्यासलम्होंकीबोरहाथा
मगरचट्टानोंसेगिररहाथाकिशबमेंइकआबशारथावो
  - M Kothiyavi Rahi
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