ab to ye soch ke bhi dil mira ghabraata hai | अब तो ये सोच के भी दिल मिरा घबराता है

  - M Kothiyavi Rahi
अबतोयेसोचकेभीदिलमिराघबराताहै
सुब्हकाभूलाहुआशामकोघरआताहै
एकइककरकेबुझेजातेहैंरख़्शंदानुजूम
एकतूहैजोब-हर-सम्तनज़रआताहै
अबतिराख़्वाबभीइकपैकर-ए-सीमींकीतरह
आसमानोंसेमिरेदिलमेंउतरआताहै
लज़्ज़त-ए-संगकीख़ातिरहीबयाबाँसेकोई
छोड़करबाग़सर-ए-राहगुज़रआताहै
दिलकीदहलीज़सेजाताहैजोइकमरमरींजिस्म
हरतरफ़घूमकेबा-दीदा-ए-तरआताहै
जिस्मथककरभीनहींराहमेंरुकतापलभर
दिलमगरउसकेशबिस्ताँमेंठहरआताहै
  - M Kothiyavi Rahi
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