rooh tanhaa gaii jannat ko subuk-saari se | रूह तन्हा गई जन्नत को सुबुक-सारी से

  - Kalb-E-Hussain Nadir
रूहतन्हागईजन्नतकोसुबुक-सारीसे
चारकेकाँधेउठाजिस्मगिराँबारीसे
ताक़ताक़तहैग़म-ए-हिज्रकीबीमारीसे
बैठतेउठतेहैंआहोंकीमदद-गारीसे
हुस्न-ए-रुख़्सारबढ़ाख़तकीनुमूदारीसे
ज़ीनत-ए-सफ़हाहुईजदवल-ए-ज़ंगारीसे
तूजोतलवारसेनहलाएलहूमेंमुझको
ग़ुस्ल-ए-सेह्हतहुआभीइश्क़कीबीमारीसे
औरतोतर्ककियासबनेशब-ए-फ़ुर्क़तमें
बेकसीबाज़आईमिरीग़म-ख़्वारीसे
  - Kalb-E-Hussain Nadir
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