zamaana bhi bulan | ज़माना भी बुलंदी पर मुझे अपना बताता है

  - "Nadeem khan' Kaavish"
ज़मानाभीबुलंदीपरमुझेअपनाबताताहै
मगरअफ़सोसगर्दिशमेंमुझेआँखेंदिखाताहै
वोजिसकोमेरीहरइकबातपहलेज़हरलगतीथी
वोअपनेबच्चोंकोमेरीहीअबग़ज़लेंसुनाताहै
परिंदेडरगएहैं,मरगएहैंख़ौफ़सेतेरे
कितेरानामसुनतेहीकबूतरफड़फड़ाताहै
तेरीयादोंकायेसैलाबदिलसेक्यूँनहींजाता
मुझेरह-रहकेतेरेखूनीआँसूमेंडुबाताहै
मुझेरोनेनहींदेतीयेज़िम्मेदारियाँघरकी
अकेलाहोताहूँतोदिलबहुतहीटूटजाताहैं
दुआएँसाथचलतीहैंमेरेमाँ-बापकीयारों
कोईभीहादसाहो,मेरेआगेसरझुकाताहैं
  - "Nadeem khan' Kaavish"
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