muhabbat ki gazlen sunaate nahin hain | मुहब्बत की गज़लें सुनाते नहीं हैं

  - "Nadeem khan' Kaavish"
मुहब्बतकीगज़लेंसुनातेनहींहैं
पताशायरोंकाबतातेनहींहैं
मेरेकमरेंमेंअबउदासीहैक़ायम
मगरभीड़मेंहमदिखातेनहींहैं
कहींहमशराबीहोजाएयारों
सोज़्यादाभीपानीमिलातेनहींहैं
मुहब्बतमेंपर्दाउठातेहैंलेकिन
झुकीइसनज़रकोउठातेनहींहैं
कहींयेहो,दुनियासरपेउठाले
शरीफोंकोज़्यादापिलातेनहींहैं
हाँमानाकिसिगरटजलातेहैंलेकिन
किसीकेभीदिलकोजलातेनहींहैं
बतादेंगेतुमको,बिछड़नाहैंकैसे
मुहब्बत-वुहब्बतसिखातेनहींहैं
  - "Nadeem khan' Kaavish"
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy