ho ga.e naakaam to pachtaayein kya | हो गए नाकाम तो पछताएँ क्या

  - Kaif Ahmad Siddiqui
होगएनाकामतोपछताएँक्या
दोस्तोंकेसामनेशरमाएँक्या
होरहेहैंफ़ेलहमदोसालसे
घरमेंजाकरअपनामुँहदिखलाएँक्या
जबकिसीसूरतनहींइससेमफ़र
इम्तिहाँकेनामसेघबराएँक्या
यादकरलेंआजथोड़ासासबक़
मास्टरसाहबकेडंडेखाएँक्या
जबगुरुजीख़ुदनहींसमझेसवाल
अपनेशागिर्दोंकोवोसमझाएँक्या
पढ़नहींसकतेतोशैतानीकरें
गएस्कूलमेंतोजाएँक्या
आओहमआपसमेंकुछझगड़ाकरें
खेलसेअबअपनादिलबहलाएँक्या
पूछतेहैंमास्टरहमकौनहैं
कोईबतलाओकिहमबतलाएँक्या
जबकहींज़ौक़-ए-सुख़न-फ़हमीनहीं
'कैफ़'साहबकीग़ज़लहमगाएँक्या
  - Kaif Ahmad Siddiqui
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