mujh ko ta'leem se nafrat hi sahi | मुझ को ता'लीम से नफ़रत ही सही

  - Kaif Ahmad Siddiqui
मुझकोता'लीमसेनफ़रतहीसही
औरखेलोंसेमोहब्बतहीसही
मैंनेइससेतोबड़ेकामलिए
आपकोखेलसेवहशतहीसही
इम्तिहाँसेमैंनहींघबराता
फ़ेलहोनामिरीक़िस्मतहीसही
पढ़नेवालोंनेभीक्याकुछकिया
नक़्लकरनामिरीआदतहीसही
मैंनेतोसिर्फ़गुज़ारिशकीथी
सबकीनज़रोंमेंशिकायतहीसही
मैंकिसीसेलड़ूँगाहरगिज़
दबकेरहनामिरीफ़ितरतहीसही
मैंछोड़ूँगाशराफ़तकाचलन
येशराफ़तमिरीज़िल्लतहीसही
कभीचूमेगीक़दमख़ुदमंज़िल
आजहरगामपेदिक़्क़तहीसही
येमुसीबतभीबड़ीदिलकशहै
ज़िंदगीएकमुसीबतहीसही
'कैफ़'इकदिनयेबनादेगीतुझे
शेर-गोईतिरीआदतहीसही
  - Kaif Ahmad Siddiqui
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