दरियाकीमौजहीमेंनहींइज़्तिराबहै
संग-ए-रवाँकेदिलमेंभीइकज़ख़्म-ए-आबहै
हरफ़र्दआजटूटतेलम्होंकेशोरमें
अस्र-ए-रवाँकीजागतीआँखोंकाख़्वाबहै
वोख़ुदहीअपनीआगमेंजलकरफ़नाहुआ
जिससाएकीतलाशमेंयेआफ़्ताबहै
अबकोईनिस्फ़दामपेभीपूछतानहीं
येज़िंदगीनिसाबसेख़ारिजकिताबहै
पलकोंपेआजनींदकीकिर्चेंबिखरगईं
शीशेकीआँखमेंकोईपत्थरकाख़्वाबहै
ऐ'कैफ़'ना-क़दोंकेतअस्सुबकेबावजूद
मेराहरएकशे'रअदबकीकिताबहै