sard jazbe bujhe bujhe chehre | सर्द जज़्बे बुझे बुझे चेहरे

  - Kaif Ahmad Siddiqui
सर्दजज़्बेबुझेबुझेचेहरे
जिस्मज़िंदाहैंमरगएचेहरे
आजकेदौरकीअलामतहैं
फ़लसफ़ीज़ेहनसोचतेचेहरे
सैल-ए-ग़मसेभीसाफ़होसके
गर्द-आलूदमल्गजेचेहरे
यख़-ज़दासोचकेदरीचोंमें
किसनेदेखेहैंकाँपतेचेहरे
इकबरसभीअभीनहींगुज़रा
कितनीजल्दीबदलगएचेहरे
मैंनेअक्सरख़ुदअपनेचेहरेपर
दूसरोंकेसजालिएचेहरे
वोतोनिकलेबहुतहीबद-सूरत
'कैफ़'देखेथेजोसजेचेहरे
  - Kaif Ahmad Siddiqui
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy