ik saanp mujh ko choom ke tiryaaq de gaya | इक साँप मुझ को चूम के तिरयाक़ दे गया

  - Kaif Ahmad Siddiqui
इकसाँपमुझकोचूमकेतिरयाक़देगया
लेकिनवोअपनेसाथमिराज़हरलेगया
अक्सरबदनकीक़ैदसेआज़ादहोकेभी
अपनाहीअक्सदूरसेमैंदेखनेगया
दुनियाकाहरलिबासपहननापड़ाउसे
इकशख़्सजबनिकलकेमिरेजिस्मसेगया
ऐसीजगहकिमौतभीडरजाएदेखकर
मैंख़ुदकोज़िंदगीसेबहुतदूरलेगया
महसूसहोरहाहैकिमैंख़ुदसफ़रमेंहूँ
जिसदिनसेरेलपरमैंतुझेछोड़नेगया
कितनीसुबुकसीआजमिरेघरकीशामथी
मैंफ़ाइलोंकाबोझउठाएहुएगया
अश'आरकानुज़ूलहैख़ालीदिमाग़में
'कैफ़'तूजानेकहाँछोड़नेगया
  - Kaif Ahmad Siddiqui
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy