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Javed Aslam
har koi aadmi nahin hota
har koi aadmi nahin hota | हर कोई आदमी नहीं होता
- Javed Aslam
हर
कोई
आदमी
नहीं
होता
आदमी
ग़म-गुसार
होता
है
- Javed Aslam
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
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क्या
लोग
हैं
कि
दिल
की
गिरह
खोलते
नहीं
आँखों
से
देखते
हैं
मगर
बोलते
नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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अपनी
हस्ती
का
भी
इंसान
को
इरफ़ांन
हुआ
ख़ाक
फिर
ख़ाक
थी
औक़ात
से
आगे
न
बढ़ी
Shakeel Badayuni
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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बस-कि
दुश्वार
है
हर
काम
का
आसाँ
होना
आदमी
को
भी
मुयस्सर
नहीं
इंसाँ
होना
Mirza Ghalib
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कुछ
लोग
ख़यालों
से
चले
जाएँ
तो
सोएँ
बीते
हुए
दिन
रात
न
याद
आएँ
तो
सोएँ
Habib Jalib
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मिरे
किरदार
जाने
दे
नज़रअंदाज
कर
दे
ख़ुदा
की
फ़िल्म
है
ये
आदमी
से
क्या
शिकायत
Vikram Sharma
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तुम
हो
इक
मौज,
समुंदर
से
वफ़ा
करते
हो
दिल-लगी
इसके
किनारों
से
किया
करते
हो
Javed Aslam
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आप
ने
फेर
ली
नज़र
अपनी
अब
मुझे
ही
नहीं
ख़बर
अपनी
आप
की
तो
कमी
रही
लेकिन
ज़िन्दगी
हो
गई
बसर
अपनी
मुड़
के
देखा
तो
ये
नज़र
आया
कितनी
मुश्किल
थी
ये
डगर
अपनी
शाम
क़िस्मत
में
मेरी
हो
कि
न
हो
शाद
कर
लूँ
मैं
दोपहर
अपनी
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Javed Aslam
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बदगुमानी,
अना,
हसद
'असलम'
ख़ाक
रिश्तों
पे
डार
जाते
हैं
Javed Aslam
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शक्ल
पर
शक्लें
चिपकी
होती
हैं
एक
आ
कर
हज़ार
जाते
हैं
Javed Aslam
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वो
रास्ते
भी
आज
कई
मंज़िला
हुए
मेरा
जो
रास्ता
था
ज़मीं
पर
नहीं
रहा
Javed Aslam
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