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Javed Aslam
tum ho ik mauj samundar se vafaa karte ho
tum ho ik mauj samundar se vafaa karte ho | तुम हो इक मौज, समुंदर से वफ़ा करते हो
- Javed Aslam
तुम
हो
इक
मौज,
समुंदर
से
वफ़ा
करते
हो
दिल-लगी
इसके
किनारों
से
किया
करते
हो
- Javed Aslam
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दरिया
के
किनारे
पे
मिरी
लाश
पड़ी
थी
और
पानी
की
तह
में
वो
मुझे
ढूँड
रहा
था
Adil Mansuri
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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तूफ़ानों
से
आँख
मिलाओ
सैलाबों
पे
वार
करो
मल्लाहों
का
चक्कर
छोड़ो
तैर
के
दरिया
पार
करो
Rahat Indori
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सभी
को
ग़म
है
समुंदर
के
ख़ुश्क
होने
का
कि
खेल
ख़त्म
हुआ
कश्तियाँ
डुबोने
का
Shahryar
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ये
कब
कहते
हैं
कि
आकर
हमको
गले
लगा
ले
वो
मिल
जाए
तो
रस्मन
ही
बस
हाथ
मिला
ले
काफ़ी
है
इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
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Vashu Pandey
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शदीद
प्यास
थी
फिर
भी
छुआ
न
पानी
को
मैं
देखता
रहा
दरिया
तिरी
रवानी
को
Shahryar
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बड़े
बूढों
के
घर
को
अब
जो
बच्चे
छोड़
देते
हैं
समुंदर
साहिलों
तक
आ
के
रस्ता
मोड़
देते
हैं
वसीयत
में
कोई
भी
दस्तख़त
जाली
नहीं
होता
ये
पूरे
होश
में
अपने
ही
घर
को
तोड़
देते
हैं
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anupam shah
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मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
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उदासी
इक
समुंदर
है
कि
जिसकी
तह
नहीं
है
मैं
नीचे
और
नीचे
और
नीचे
जा
रहा
हूँ
Charagh Sharma
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ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
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घर
मिरा
जगमगाया
करे
तू
यूँँ
ही
रोज़
आया
करे
चार
दिन
की
तो
हो
चाँदनी
फिर
अँधेरा
डराया
करे
मैं
बुलंदी
को
छूता
रहूँ
तोहमतें
वो
लगाया
करे
थाम
ले
हाथ
अपना
कोई
जब
क़दम
डगमगाया
करे
याद
अच्छी
मिरे
साथ
हो
तल्ख़ियाँ
धुँधलाया
करे
जब
भी
लौटूँ
मैं
घर
को
मिरे
माँ
खड़ी
मुस्कुराया
करे
देखा
सपने
में
जन्नत
में
थे
तुम
ही
थे
वो
ख़ुदाया
करे
तेरि
ख़ातिर
ऐ
'असलम'
यहाँ
क्यूँ
कोइ
वक़्त
ज़ाया'
करे
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Javed Aslam
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देखता
रहता
हूँ
उसको
मैं
फ़लक-बीनों
से
उसकी
आवाज़
भी
आती
है
मिरे
कानों
में
Javed Aslam
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टूटना
ही
है
जान
कर
भी
ये
फूल
क्यूँँ
बार
बार
खिलता
है
Javed Aslam
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क्यूँ
ज़मीं
पर
कहीं
ख़ला
होगा
हम
न
होंगे
तो
दूसरा
होगा
Javed Aslam
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मर
गए
तो
क्या
होगा
तर्क-ए-मस'अला
होगा
वरसा
इम्तिहाँ
देंगे
मेरा
फ़ैसला
होगा
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Javed Aslam
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