shab-e-firaq ko yuñ jagmaga raha hooñ main | शब-ए-फ़िराक़ को यूँँ जगमगा रहा हूँ मैं

  - Jagjeewan Lal Asthana sahar
शब-ए-फ़िराक़कोयूँँजगमगारहाहूँमैं
बुझाकेशम्अकोअबदिलजलारहाहूँ
ख़याल-ए-यारकोदिलमेंबसारहाहूँमैं
तसव्वुरातकीदुनियासजारहाहूँमैं
ग़म-ए-हयातग़म-ए-दिलकालुत्फ़पानेको
अजलकेहाथसेदामनछुड़ारहाहूँमैं
अजीबहालहैशाख़ोंसेफूलझड़तेहैं
भरीबहारमेंआँसूबहारहाहूँमैं
येराज़फ़ाशहोजाएआँसूओंसेकहीं
तुम्हारेग़मकोतुम्हींसेछुपारहाहूँमैं
लबपेकोईशिकायतदिलहैफ़रियादी
तुम्हारीबज़्मसेख़ामोशजारहाहूँमैं
उठाओसाज़मिलाओदिलोंकेतारोंको
नईहयातकेनग़्मेंसुनारहाहूँमैं
विसाल-ओ-हिज्रकाआलमअजीबआलमहै
फ़सानाशबका'सहर'कोसुनाहूँमैं
  - Jagjeewan Lal Asthana sahar
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