jab tasavvur tira nahin hota | जब तसव्वुर तिरा नहीं होता

  - Jagjeewan Lal Asthana sahar
जबतसव्वुरतिरानहींहोता
ज़िंदगीमेंमज़ानहींहोता
दर्ददिलकाछुपाएरखनेको
मुस्कुरानाबुरानहींहोता
ज़िंदगीहोकेरहगईबोझल
अबकोईहादसानहींहोता
शे'रलिखताहूँख़ूनसेफिरभी
दर्दकाहक़अदानहींहोता
उम्रगुज़रीहमेंसफ़रकरते
फ़ासलाकमज़रानहींहोता
याद-ए-माज़ीसेक्यूँउलझतेहो
इससेकुछफ़ाएदानहींहोता
ज़िंदगीबोझबनगईजबसे
ख़ौफ़ग़मकाज़रानहींहोता
'सहर'आईयेसहरकैसी
किउजालाज़रानहींहोता
  - Jagjeewan Lal Asthana sahar
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