naye sheeshe men ab dhal jaa.e har rasm-e-kuhan saaqi | नए शीशे में अब ढल जाए हर रस्म-ए-कुहन साक़ी

  - Jagjeewan Lal Asthana sahar
नएशीशेमेंअबढलजाएहररस्म-ए-कुहनसाक़ी
तुझेदुनियाबदलतीहैमुझेयेअंजुमनसाक़ी
वहाँकिसकामकेयेसाग़र-ओ-मीना-ओ-पैमाना
जहाँचलताहैतेरीमस्तआँखोंकाचलनसाक़ी
आँखउट्ठीमयछलकीसाग़रदौरमेंआया
मुझेदेतारहाधोकेयेतेराबाँकपनसाक़ी
लिखाहैनाममेरायूँँतोहरइकशाख़परलेकिन
मेरेफूलहैंसाक़ीमेराहैचमनसाक़ी
हटासाग़रमेरेसामनेसेइसकोरहनेदे
किइससेझाँकतीहैमेरेख़्वाबोंकीदुल्हनसाक़ी
मज़ाजबहैमिरीमस्तीकोतूदो-आतिशाकरदे
निगाहोंसेनिगाहोंकाभीहोनेदेमिलनसाक़ी
ज़राभीगीहुईज़ुल्फ़ोंकीदोइकबूँदटपकादे
सुलगताहैजानेकबसेमेरातन-बदनसाक़ी
तिरीज़ुल्फ़ोंकेसाएमेंढलीरातोंकाक्याकहना
मगरकुछऔरकहताहै'सहर'काबाँकपनसाक़ी
  - Jagjeewan Lal Asthana sahar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy