zindagi mirii kabhi gham se juda ho na saki | ज़िंदगी मेरी कभी ग़म से जुदा हो न सकी

  - Jagjeewan Lal Asthana sahar
ज़िंदगीमेरीकभीग़मसेजुदाहोसकी
दर्दबढ़ताहीगयाऔरदवाहोसकी
ज़िंदगीमैंनेबहुतनाज़उठाएतेरे
येअलगबातकितुझसेहीवफ़ाहोसकी
जानेकिसदौरमेंक्याजुर्मकियाथाहमने
ज़िंदगीबीतगईख़त्मसज़ाहोसकी
फूलहीफूलहैंहरशाख़-ए-गुलिस्ताँपेमगर
मेरीतक़दीरहीअफ़्सोसरसाहोसकी
साथसबछोड़गएहिज्रमेंमेरालेकिन
क्यूँतिरीयादमिरेदिलसेजुदाहोसकी
आदमीटूटगयाजुस्तुजूकरतेकरते
ज़िंदगीदाम-ए-मुसीबतसेरिहाहोसकी
बिछगईधूपहरइकसम्तउजालोंकीमगर
दूरदिलसेमिरेज़ुल्मतकीघटाहोसकी
सोचतारहताहूँअक्सरशब-ए-तन्हाईमें
ज़िंदगीक्यूँमिरीमरहून-ए-दुआहोसकी
क्याअजबचीज़हैइज़हार-ए-मोहब्बतभी'सहर'
बातलम्होंकीथीसदियोंमेंअदाहोसकी
  - Jagjeewan Lal Asthana sahar
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