tishna-labon ki nazr ko sougaat chahiye | तिश्ना-लबों की नज़्र को सौग़ात चाहिए

  - Jafar Tahir
तिश्ना-लबोंकीनज़्रकोसौग़ातचाहिए
तेरेनिसारथोड़ीसीबरसातचाहिए
इतनाभीमय-कदेपेपहरेबिठाईए
कुछतोख़याल-ए-अहल-ए-ख़राबातचाहिए
आपसकीगुफ़्तुगूमेंभीकटनेलगीज़बाँ
अबदोस्तोंसेतर्क-ए-मुलाक़ातचाहिए
मुद्दतसेचश्म-ओ-दिलमेंकोईराब्तानहीं
क्याऔरतुझकोगर्दिश-ए-हालातचाहिए
किसकिसख़ुदाकेसामनेसज्दानहींकिया
कुछशर्मकुछतोआबरू-ए-ज़ातचाहिए
ज़िक्र-ए-परी-वशाँकेज़मानेगुज़रगए
अबतोग़ज़लमेंहम्द-ओ-मुनाजातचाहिए
इंसाफ़कीयेआँखयेसूरजकीरौशनी
यारबयहीहैदिनतोमुझेरातचाहिए
हमचाहतेहैंदहरमेंजीनेकाहक़मिले
उनकोसुबूत-ए-फ़र्रुख़ी-ए-ज़ातचाहिए
कुछभीहोमस्लहतकातक़ाज़ामगरनदीम
जोदिलमेंहोज़बाँपेवहीबातचाहिए
ज़ुल्फ़-ए-नाज़कोईहवा-ए-फ़ुसूँकादाम
अहल-ए-नज़रकोसैर-ए-तिलिस्मातचाहिए
ताब-ए-कमंद-ए-काकुल-ए-ख़म-दारहोशियार
खुलकरहरकिसीपेइनायातचाहिए
'ताहिर'जज़ा-ए-हिम्मत-ए-आलीहैज़ुल्फ़-ए-यार
ज़ुल्फ़ोंसेखेलनेकेलिएहातचाहिए
  - Jafar Tahir
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy