ye aur baat ki ye seher besh-o-kam pe chala | ये और बात कि ये सेहर बेश-ओ-कम पे चला

  - Jafar Tahir
येऔरबातकियेसेहरबेश-ओ-कमपेचला
सियाह-रातकाजादूमगरहमपेचला
उधरसेपहलेभीकुछसरफ़रोशगुज़ारेथे
रह-ए-तलबमेंनिशान-ए-क़दमक़दमपेचला
येताइरान-ए-चमनकानसीबक्याकहिए
वोतीरउनकेलिएवक़्फ़हैजोकमपेचला
ख़ुदाख़ुदाकेइशारेपेलौटलौटगया
तड़पतड़पकेतरीक़-ए-सनमसनमपेचला
कभीख़ुदाकीपरस्तिशकभीसना-ए-बुताँ
रह-ए-अरबपेकभीजादा-ए-अजमपेचला
असीर-ए-दामहोगामिरादिल-ए-आज़ाद
किसीकाहुक्मकभीमौज-ए-यम-ब-यमपेचला
तुझेभीदेखलियाहमनेख़ुदा-ए-अजल
कितेराज़ोरचलाभीतोअहल-ए-ग़मपेचला
येनक़्श-ए-पाहैंकिज़ंजीर-ए-मौज-ए-ख़ूँयारो
येकौनतुरफ़ा-जवाँजादा-ए-सितमपेचला
लब-ओ-निगाहपेमोहरेंलगीरहीं'ताहिर'
किसीकाज़ोरलेकिनमिरेक़लमपेचला
  - Jafar Tahir
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