arz-o-sama pe rang tha kaisa utar gaya | अर्ज़-ओ-समा पे रंग था कैसा उतर गया

  - Jafar Shirazi
अर्ज़-ओ-समापेरंगथाकैसाउतरगया
आँधीचलीतोशामकाचेहराउतरगया
तूफ़ाँकीज़दशोर-ए-तलातुममुझेबताओ
मैंमौजमेंनहींहूँकिदरियाउतरगया
क्याक्यारहीकनार-ए-मोहब्बतकीधुनमुझे
जिनपानियोंमेंउसनेउताराउतरगया
इककश्मकशमेंअबहैंसमुंदरपड़ेहुए
सहराकीतहमेंफिरकोईप्यासाउतरगया
बिखरापड़ाहैख़ाकपेयूँँचाँदनीकाजिस्म
जैसेमिरीहीरूहमेंतेशाउतरगया
'जाफ़र'कभीयेमेरेवहम-ओ-गुमाँमेंथा
मैंऔरउसकेध्यानसेऐसाउतरगया
  - Jafar Shirazi
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