jee larzata hai umdati hui tanhaaii se | जी लरज़ता है उमडती हुई तन्हाई से

  - Jafar Shirazi
जीलरज़ताहैउमडतीहुईतन्हाईसे
अबनिकालोमुझेउसरातकीपहनाईसे
आईयादोंकीहवाघुलनेलगाकानमेंज़हर
बुझगईशामभीबजतीहुईशहनाईसे
पूछताफिरताहूँगलियोंकेउजड़नेकासबब
हरतरफ़जम्अ''हैंक्यालोगतमाशाईसे
सामनेफैलाहुआदश्तकासन्नाटाहै
अबकहाँबचकेचलेंहमदिल-ए-सौदाईसे
बनगयाएकक़यामतदर-ए-दिलतकआना
औरगुज़रनाहैअभीध्यानकीअँगनाईसे
किसतरहअपनाबनाएँउसेहम'जाफ़र'
बातआगेबढ़ीजिसकीशनासाईसे
  - Jafar Shirazi
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