suraj chhupa ik ik gul-e-manzar bikhar gaya | सूरज छुपा इक इक गुल-ए-मंज़र बिखर गया

  - Jafar Shirazi
सूरजछुपाइकइकगुल-ए-मंज़रबिखरगया
शो'लासाकोईदिलमेंउतरकरबिखरगया
थाचाँदनीकाजिस्मकिशीशेकाथाबदन
आईहवातोगिरकेज़मींपरबिखरगया
कलहँसकेरेग-ए-दश्तसेकहतीथीज़िंदगी
मैंनेछुआहीथाकिवोपत्थरबिखरगया
नद्दीपेएकनर्मकिरननेरखाजोपाँव
चारोंतरफ़सदाकासमुंदरबिखरगया
'जाफ़र'हमारादिलभीहैवोआइनाकिबस
खाईज़रानिगाहकीठोकरबिखरगया
  - Jafar Shirazi
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