aks jaa-b-jaa apni zaat ke girata hai | अक्स जा-ब-जा अपनी ज़ात के गिराता है

  - Jafar Shirazi
अक्सजा-ब-जाअपनीज़ातकेगिराताहै
कौनआसमानोंसेआइनेगिराताहै
मैंनेरूपधाराहैउसकीरूहकाऔरवो
मेरेनक़्शहीमेरेसामनेगिराताहै
उम्रभरउठाएगादुखमिरेबिखरनेका
आँखकीबुलंदीसेक्यूँँमुझेगिराताहै
शो'ला-ए-मोहब्बतऔरआब-ए-अश्कनादाँ
रौशनीकोदरियामेंकिसलिएगिराताहै
वोहवाकाझोंकाभीमेरासख़्तदुश्मनहै
शाख़सेजोपत्तेकोज़ोरसेगिराताहै
जज़्बकरले'जाफ़र'सोचलहरकीतुझको
तूकहाँसमुंदरमेंकंकरेगिराताहै
  - Jafar Shirazi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy